आरक्षण के चर्चित विषय को रुपहले पर्दे पर उतार रहे निर्माता-निर्देशक प्रकाश झा ने कहा कि उनकी आगामी फिल्म ‘आरक्षण: इंडिया वर्सेज इंडिया’ में मंडल आयोग की सिफारिशों के लागू होने के बाद हुए आंदोलन का कोई प्रसंग नहीं है.
आगामी फिल्म ‘आरक्षण’ के प्रचार के सिलसिले में पटना पहुंचे प्रकाश झा ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि देश में शिक्षा व्यवस्था के माफियाकरण और व्यवसायीकरण के कारण जो दुविधापूर्ण स्थिति उत्पन्न हुई है उस पर उनकी फिल्म केंद्रित है. फिल्म में मंडल आयोग के कारण हुए आंदोलन और चर्चित राजीव गोस्वामी के आत्मदाह का कोई प्रसंग नहीं है.
उन्होंने कहा कि आरक्षण समाज की सचाई है. इसके पक्ष और विपक्ष दोनों में तर्क दिये जा सकते हैं. शिक्षण संस्थाओं में आरक्षण के कारण एक वर्ग को सीटें सुलभ हुई है तो किसी दूसरे वर्ग के लिए अवसर कम हुए हैं. प्रकाश झा ने कहा कि आरक्षण फिल्म में पिछले दो-तीन दशक में शिक्षा का जो परिदृश्य देश में उभरा है उसका उल्लेख है. आज वही सफल हो रहा है जिसके पास पैसा है, जिसके पास 10 करोड़ की संपत्ति है वह सरकार की अनुमति से विश्वविद्यालय खोल सकता है.
प्रकाश झा ने बताया कि अमिताभ बच्चन, मनोज वाजपेयी, दीपिका पादुकोण और सैफ अली खान अभिनीत यह फिल्म कोचिंग संस्थानों और निजी शैक्षिक संस्थानों के रूप में करोड़ों रुपये के चल रहे समांतर शिक्षा व्यवसाय की सच्चाई देश के सामने रखेगी. यह व्यवसाय प्रतिवर्ष 30 से 40 फीसदी की दर से प्रगति कर रहा है. यह फिल्म आगामी 12 अगस्त को देश भर में रिलीज होगी.
राजनीति में विफल रहने वाले प्रकाश झा ने शिक्षा के कारोबार के लिए नेताओं को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में कई नेताओं के पास कई कई कालेज हैं. ऐसे कालेजों में अभिभावकों और विद्यार्थियों से पैसे की उगाही होती है.
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Germany how BNI members have come together to help each other...BNI is more
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4 hours ago








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